Wo phla din or wo phir muskil c zindgi

Ghr h pr q ghar sa nhi lgta, Har koyi apna hor bhi yha apna sa nhi lgta But gai do Rahon Mein Meri Jindagi, Kho Gaya Kahin vajud Mera Hak hokar Bhi Mujhe….. Kyon FIR Kisi per Apna Hak Nahin Lagta. Kahan hai Khushiyan Meri kahan Meri ichcha hai, Kabhi Kisiko Mujhmein khubiya NajarContinue reading “Wo phla din or wo phir muskil c zindgi”

कली का यौवन

मैं एक कली थी ।। कुछ इस तरह एक बगिया मे ।। एक डाल पर खिली थी ।। पहले मेरी कुछ पहचान बनी ।। थोड़ी मैं नादान बनी ।। फूट पड़ी मुझमे पंखुड़िया ।। धीरे धीरे बढ़ चली ।। तब बगिया के फूलो मे ।। गिनती होने लगी ।। हर कोई मुझे निहारे ।। कुछContinue reading “कली का यौवन”

मै भी मजदूर

देखा मैने सरकारों को । देखा मैने बाजारों को । पैदल पैदल कर्म चले क्यू ना आज आंख जले । हा मै मजदूर हूं मै मजबुर हूं । घर से बड़ी दूर हूं । कल फिर उठूंगा कर्म करूंगा । हा मै मजदूर हूं मै भी मजदूर

Corona

कैसी फैली ये छुआ छूत की बीमारी है ।। बचा नहीं यहां राजा से लेकर भिकारी है ।। देश बन्द विदेश बन्द संकट ये बड़ा भारी है ।। झेल रही इस आपदा को दुनिया सारी है ।। बन्द हो गया सबका घर से निकलना वाहन तो क्या ।। मुश्किल है बड़ा पैदल भी चलना ।।Continue reading “Corona”

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